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हरतालिका तीज व्रत कथा, पूजा विधि और 2026 में तिथि: जानें अखंड सौभाग्य के इस महापर्व का महत्व

हरतालिका तीज व्रत कथा, पूजा विधि, Hartalika Teej Vrat Katha

हरतालिका तीज व्रत कथा | सनातन धर्म में सुहागिन महिलाओं के लिए तीज के व्रतों का बहुत अधिक महत्व है। इनमें सबसे कठिन और फलदायी व्रत हरतालिका तीज (Hartalika Teej) को माना जाता है। भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाया जाने वाला यह पर्व अखंड सौभाग्य, पति की लंबी आयु और सुयोग्य वर की प्राप्ति के लिए रखा जाता है।

यह व्रत मुख्य रूप से माता पार्वती और भगवान शिव को समर्पित है। इस लेख में हम आपको हरतालिका तीज 2026 की सही तिथि, शुभ मुहूर्त, व्रत का नियम, संपूर्ण पूजा विधि और प्रामाणिक व्रत कथा के बारे में विस्तार से बताएंगे।

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हरतालिका तीज व्रत कथा (Hartalika Teej Vrat Katha in Hindi)

पौराणिक कथा के अनुसार, भगवान शिव ने स्वयं माता पार्वती को उनके पूर्व जन्म की याद दिलाते हुए इस व्रत की महिमा सुनाई थी।

शिव जी ने कहा था: हे गोरी! तुमने मुझे पति के रूप में पाने के लिए हिमालय पर्वत पर अत्यंत कठिन तपस्या की थी। तुम्हारा बाल्यकाल बहुत ही कठिन साधना में बीता। तुमने बारह वर्षों तक केवल हवा पीकर गुजारे थे। कड़कड़ाती ठंड में तुम जल में खड़ी रहीं और चिलचिलाती धूप में तुमने पंचाग्नि तपी। सावन-भादों की मूसलाधार बारिश में भी तुमने बिना अन्न-जल के खुले आसमान के नीचे तपस्या जारी रखी।

हरतालिका तीज व्रत कथा

तुम्हारी इस विकट परिस्थिति को देखकर तुम्हारे पिता पर्वतराज हिमालय अत्यंत दुखी और चिंतित रहते थे। एक दिन तुम्हारी तपस्या और पिता की चिंता को देखकर देवर्षि नारद तुम्हारे पिता के पास आए।

नारद जी ने हिमालय राज से कहा, “हे पर्वतराज! मैं भगवान विष्णु के भेजने पर यहां आया हूं। आपकी बेटी की कठिन तपस्या से प्रसन्न होकर वे उनसे विवाह करना चाहते हैं। मैं इस विवाह का प्रस्ताव लेकर आया हूं।”

हिमालय राज यह सुनकर अत्यंत प्रसन्न हुए और उन्होंने तुरंत इस विवाह प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। जब नारद जी ने भगवान विष्णु को यह शुभ समाचार सुनाया, तो वे भी प्रसन्न हो गए।

लेकिन जब तुम्हें (माता पार्वती को) इस बात का पता चला कि तुम्हारे पिता तुम्हारा विवाह भगवान विष्णु से करना चाहते हैं, तो तुम अत्यंत दुखी हो गईं। तुम रोती हुई अपनी एक प्रिय सहेली के पास गईं और उससे कहा, “हे सखी! मैं मन, वचन और कर्म से भगवान शिव को अपना पति चुन चुकी हूं। मेरे पिता मेरा विवाह विष्णु जी से कराना चाहते हैं। यदि ऐसा हुआ तो मैं अपने प्राण त्याग दूंगी।”

तुम्हारी सखी अत्यंत चतुर और समझदार थी। उसने तुमसे कहा, “हे देवी! तुम शांत हो जाओ। प्राण त्यागने की कोई आवश्यकता नहीं है। चलो, हम एक ऐसे घने जंगल में चलते हैं जहां तुम्हारे पिता तुम्हें ढूंढ न सकें। वहां तुम एकांत में अपनी साधना पूरी करना।”

तुम अपनी सखी की बात मानकर घने जंगलों की ओर चल पड़ीं। सहेली द्वारा तुम्हारा हरण (छिपाकर ले जाना) किए जाने के कारण ही आगे चलकर इस व्रत का नाम ‘हरतालिका’ पड़ा।

जंगल में नदी के तट पर एक गुफा में तुमने पुनः अपनी तपस्या शुरू की। भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को हस्त नक्षत्र था। उस दिन तुमने रेत (बालू) से मेरी (शिव जी की) एक शिवलिंग बनाई और रात भर निराहार और निर्जला रहकर मेरी स्तुति की। तुमने पूरी रात जागकर जागरण और भजन-कीर्तन किया।

तुम्हारी इस कठोर तपस्या और अनन्य भक्ति से मेरा आसन डोल गया। मैं उसी समय उस गुफा में प्रकट हुआ और मैंने तुमसे वरदान मांगने को कहा। तब तुमने अत्यंत संकोच के साथ कहा, “हे देवाधिदेव! यदि आप वास्तव में मेरी तपस्या से प्रसन्न हैं, तो मुझे अपनी अर्धांगिनी (पत्नी) के रूप में स्वीकार कर लीजिए।”

मैंने ‘तथास्तु’ कहकर तुम्हारी प्रार्थना स्वीकार कर ली और अंतर्ध्यान हो गया। अगले दिन सुबह तुमने व्रत का पारण किया और समस्त पूजा सामग्री को नदी में विसर्जित कर दिया।

उसी समय तुम्हारे पिता हिमालय राज तुम्हें ढूंढते हुए उस गुफा तक पहुंच गए। तुम्हें सकुशल देखकर उनकी आंखों में आंसू आ गए। उन्होंने तुमसे घर लौटने की जिद की। तब तुमने दृढ़ता से कहा, “पिताजी! मैं घर तभी चलूंगी जब आप मेरा विवाह भगवान शिव से कराने का वचन देंगे। मैंने जंगलों में भटककर उन्हीं के लिए यह कठिन तप किया है।”

पर्वतराज हिमालय ने अपनी पुत्री की हठ और भक्ति के आगे घुटने टेक दिए और उन्होंने सहर्ष तुम्हारा विवाह मेरे (भगवान शिव के) साथ कराने का वचन दिया। इसके बाद वे तुम्हें वापस घर ले गए और पूरे विधि-विधान के साथ हमारा विवाह संपन्न हुआ।

व्रत का फल: भगवान शिव ने कथा का अंत करते हुए कहा, “हे पार्वती! जो भी सुहागिन महिला या कुंवारी कन्या भाद्रपद शुक्ल तृतीया को इस व्रत को पूरी श्रद्धा, निष्ठा और निर्जला रहकर करेगी, उसे तुम्हारी तरह ही अखंड सौभाग्य और सुयोग्य वर की प्राप्ति होगी। उसके जीवन के सभी कष्ट दूर हो जाएंगे।

हरतालिका तीज 2026 में कब है? (Hartalika Teej 2026 Date & Shubh Muhurat)

हर साल की तरह इस साल भी महिलाओं में इस व्रत को लेकर असमंजस रहता है कि व्रत किस दिन रखा जाए। साल 2026 में हरतालिका तीज की सही तिथि और शुभ मुहूर्त नीचे दिए गए हैं:

  • हरतालिका तीज तिथि: 14 सितंबर 2026, दिन सोमवार
  • तृतीय तिथि का प्रारंभ: 13 सितंबर 2026 को रात से
  • तृतीया तिथि की समाप्ति: 14 सितंबर 2026 को शाम तक

विशेष नोट: उदयातिथि के नियम के अनुसार, 14 सितंबर 2026 को ही महिलाओं को निराहार और निर्जला व्रत रखना है। सोमवार का दिन होने के कारण इस बार इस व्रत का महत्व और भी अधिक बढ़ गया है, क्योंकि सोमवार भगवान शिव का ही प्रिय दिन है।

हरतालिका तीज पूजा के शुभ मुहूर्त

  • प्रातःकाल पूजा का मुहूर्त: सुबह 06:06 AM से सुबह 08:34 AM तक
  • प्रदोष काल पूजा का मुहूर्त: शाम को 06:25 PM से रात 08:45 PM तक (प्रदोष काल में शिव-पार्वती की पूजा का विशेष महत्व है)।

हरतालिका तीज का नामकरण और महत्व (Significance of Hartalika Teej)

हरतालिका‘ शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है— ‘हरत’ और ‘आलिका’। ‘हरत’ का अर्थ है ‘हरण करना’ (अपहरण) और ‘आलिका’ का अर्थ है ‘सहेली’।

कथाओं के अनुसार, माता पार्वती के पिता महर्षि नारद के कहने पर उनका विवाह भगवान विष्णु से तय कर चुके थे। लेकिन माता पार्वती मन ही मन भगवान शिव को अपना पति मान चुकी थीं। जब माता पार्वती की सहेलियों को इस बात का पता चला, तो वे पार्वती जी के पिता के घर से उनका ‘हरण’ करके उन्हें एक घने जंगल में ले गईं, ताकि वे अपनी इच्छा के अनुसार शिव जी की तपस्या कर सकें। सहेलियों द्वारा हरण किए जाने के कारण ही इस व्रत का नाम ‘हरतालिका तीज’ पड़ा।

हरतालिका तीज व्रत के नियम (Hartalika Teej Vrat Rules)

यह व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है, इसलिए इसे करते समय कुछ कड़े नियमों का पालन करना अनिवार्य है:

  • निर्जला और निराहार व्रत: यह व्रत पूरी तरह से निर्जला (बिना पानी के) और निराहार (बिना भोजन के) रखा जाता है। अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण करने पर ही जल ग्रहण किया जाता है।
  • व्रत की निरंतरता: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि कोई महिला एक बार इस व्रत को शुरू कर देती है, तो उसे जीवनभर यह व्रत रखना होता है। इसे बीच में छोड़ा नहीं जाता। यदि महिला बीमार हो, तो उसकी जगह उसका पति या घर की अन्य महिला इस व्रत को रख सकती है।
  • सोना वर्जित है: हरतालिका तीज के दिन और रात में सोना पूरी तरह वर्जित माना गया है। रात के समय महिलाओं को एकत्र होकर भजन-कीर्तन और जागरण करना चाहिए।
  • सोलह श्रृंगार: इस दिन सुहागिन महिलाओं को नए वस्त्र पहनकर सोलह श्रृंगार अवश्य करना चाहिए। हाथों में मेहंदी लगाना और पैरों में महावर लगाना बेहद शुभ माना जाता है।
  • क्रोध और कलह से बचें: व्रत के दिन मन को शांत रखें। किसी से अपशब्द न बोलें और घर में शांति का माहौल बनाए रखें।

हरतालिका तीज व्रत पूजा सामग्री (Pooja Samagri List)

पूजा शुरू करने से पहले सभी सामग्री एक स्थान पर एकत्रित कर लें ताकि पूजा में कोई बाधा न आए:

  • मूर्तियां बनाने के लिए: शुद्ध काली मिट्टी या बालू रेत।
  • शिव जी के लिए: धोती, अंगोछा, कलावा, जनेऊ, चंदन, रोली, अक्षत (साबुत चावल), बेलपत्र, धतूरा, शमी के पत्ते, भांग, दूर्वा, आक के फूल, गंगाजल, पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, चीनी)।
  • माता पार्वती के लिए सुहाग पिटारी: साड़ी, बिंदी, सिंदूर, चूड़ियां, मेहंदी, महावर, काजल, कंघी, शीशा, बिछिया, कुमकुम।
  • अन्य सामग्री: धूप, दीप, अगरबत्ती, कपूर, देसी घी, कलावा, फल (केला, सेब आदि), फूल, मिठाई, नारियल, और कलश।

हरतालिका तीज पूजा विधि (Step-by-Step Hartalika Teej Puja Vidhi)

हरतालिका तीज की पूजा मुख्य रूप से प्रदोष काल (शाम के समय) में की जाती है, हालांकि सुबह भी संकल्प लेकर पूजा की जा सकती है।

हरतालिका तीज पूजा विधि | Hartalika Teej Vrat Katha

1. सुबह का संकल्प

सुबह जल्दी उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद हाथ में जल और अक्षत लेकर व्रत का संकल्प लें: “मैं (अपना नाम बोलें) अपने पति की लंबी आयु और सुखी दांपत्य जीवन के लिए निर्जला हरतालिका तीज व्रत का संकल्प लेती हूँ।”

2. पूजा स्थल की तैयारी

शाम के समय घर के उत्तर-पूर्व कोने (ईशान कोण) को साफ करके वहां एक सुंदर चौकी स्थापित करें। चौकी पर पीला या लाल कपड़ा बिछाएं और केले के पत्तों से मंडप सजाएं।

3. बालू के शिव-पार्वती का निर्माण

काली मिट्टी या बालू (रेत) की सहायता से भगवान शिव, माता पार्वती और भगवान गणेश की अस्थायी मूर्तियां बनाएं। आप चाहें तो धातु या पत्थर की मूर्ति का भी उपयोग कर सकते हैं, लेकिन मिटटी की मूर्ति का विशेष महत्व है।

4. कलश स्थापना

चौकी पर एक कलश में जल भरकर रखें। कलश के मुख पर मौली बांधें, आम के पत्ते लगाएं और ऊपर से नारियल रखें। कलश के पास गणेश जी की स्थापना करें।

5. मुख्य पूजा

सबसे पहले प्रथम पूजनीय भगवान गणेश की पूजा करें। उन्हें सिंदूर, दूर्वा और मोदक अर्पित करें। इसके बाद भगवान शिव को चंदन, बेलपत्र, धतूरा, भांग और वस्त्र अर्पित करें। माता पार्वती को कुमकुम, अक्षत, फूल और सोलह श्रृंगार की सामग्री (सुहाग पिटारी) चढ़ाएं।

6. कथा श्रवण और आरती

दीपक जलाकर रखें। इसके बाद हाथ में फूल और अक्षत लेकर ‘हरतालिका तीज व्रत कथा’ ध्यानपूर्वक पढ़ें या सुनें। कथा समाप्त होने के बाद भगवान शिव और माता पार्वती की आरती करें।

7. रात्रि जागरण

पूरी रात जागकर भगवान शिव के मंत्रों (जैसे- ॐ नमः शिवाय) और माता पार्वती के भजनों का गान करें।

8. पारण और विसर्जन

अगले दिन सुबह (15 सितंबर 2026) पुनः स्नान और पूजा करने के बाद माता पार्वती को सिंदूर चढ़ाएं और उस सिंदूर से अपनी मांग भरें। इसके बाद मिट्टी की मूर्तियों को किसी पवित्र नदी, तालाब या गमले की मिट्टी में विसर्जित कर दें। इसके बाद ब्राह्मण को दान-दक्षिणा देकर या सास के पैर छूकर आशीर्वाद लें और जल पीकर व्रत का पारण करें।

हरतालिका तीज के दौरान क्या न करें? (Don’ts During Hartalika Teej)

  • दूध का सेवन वर्जित: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस व्रत के दौरान या व्रत के तुरंत बाद पारण में दूध का सेवन नहीं करना चाहिए। माना जाता है कि ऐसा करने से अगले जन्म में ‘सर्प’ योनि मिलती है (यह एक पौराणिक लोक मान्यता है)।
  • दिन में न सोएं: इस दिन सोने से व्रत का फल नष्ट हो जाता है।
  • अन्न-जल का त्याग: यदि आप पूरी तरह स्वस्थ हैं, तो भूलकर भी पानी या फल न खाएं। यह पूरी तरह निर्जला व्रत है। बीमार या गर्भवती महिलाओं के लिए नियमों में ढील दी जा सकती है।

हरतालिका तीज केवल एक व्रत नहीं, बल्कि पति-पत्नी के अटूट विश्वास, त्याग और समर्पण का प्रतीक है। जिस प्रकार माता पार्वती ने अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति और कठिन तप से भगवान शिव को प्राप्त किया, उसी प्रकार यह व्रत महिलाओं को अपने परिवार और दांपत्य जीवन में खुशहाली लाने की आत्मिक शक्ति देता है।

वर्ष 2026 में 14 सितंबर को आने वाली इस हरतालिका तीज पर यदि आप भी नियमपूर्वक और सच्ची श्रद्धा से भगवान शिव-पार्वती की आराधना करेंगी, तो आपके घर में हमेशा सुख-समृद्धि और अखंड सौभाग्य का वास रहेगा।

सभी माताओं और बहनों को हरतालिका तीज 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं! हर हर महादेव!

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