गणेश जी की कथा | प्राचीन काल की बात है, किसी गाँव में एक बहुत ही ग़रीब और अंधी बुढ़िया रहती थी। परिवार में उसके साथ एक बेटा और बहू रहते थे। वह बुढ़िया भगवान श्री गणेश जी की परम भक्त थी और प्रतिदिन सच्चे मन से उनकी पूजा-अर्चना किया करती थी।
गणेश जी की कथा और वरदान
उसकी इस निस्वार्थ और अटूट भक्ति से प्रसन्न होकर, एक दिन विघ्नहर्ता भगवान गणेश साक्षात उस बुढ़िया के सामने प्रकट हुए। उन्होंने बड़े ही स्नेह से कहा— “बुढ़िया मां! मैं तेरी भक्ति से बहुत प्रसन्न हूँ, तू जो चाहे सो मांग ले।”
बुढ़िया थोड़ी भोली थी, उसने हाथ जोड़कर कहा— “हे प्रभु! मुझे तो मांगना ही नहीं आता। मैं कैसे और क्या मांगू?” इस पर गणेश जी मुस्कुराए और बोले— “जा, अपने बहू-बेटे से पूछकर मांग ले।”

बुढ़िया की दुविधा और सलाह – गणेश जी की कहानी
बुढ़िया ने घर जाकर अपने बेटे से पूछा— “बेटा, साक्षात गणेश जी प्रकट हुए हैं और कहते हैं कि ‘तू कुछ मांग ले’, बता मैं क्या मांगू?” पुत्र ने तुरंत अपनी ज़रूरत बताते हुए कहा— “मां! तू धन मांग ले, ताकि हमारी ग़रीबी दूर हो जाए।” जब बुढ़िया ने अपनी बहू से पूछा, तो बहू ने कहा— “मां जी! आप एक नाती मांग लें।”
बुढ़िया मन ही मन सोचने लगी कि बेटा और बहू तो केवल अपने-अपने मतलब की बात कह रहे हैं। सही मार्गदर्शन के लिए उसने अपनी पड़ोसिनों से पूछा। पड़ोसिनों ने उसे समझदारी की सलाह देते हुए कहा— “अरे बुढ़िया! तू तो अब थोड़े दिन ही जीएगी, तू धन या नाती मांग कर क्या करेगी? तू तो भगवान से अपनी आंखों की रोशनी मांग ले, जिससे तेरी बची हुई ज़िंदगी आराम से कट जाए।”
बुढ़िया की चतुराई और अद्भुत वरदान – Ganesha Ji Ki Katha
बुढ़िया ने सबकी बातें सुनीं और गहराई से विचार किया। अगले दिन जब भगवान गणेश पुनः प्रकट हुए और वरदान मांगने को कहा, तो बुढ़िया ने बड़ी ही चतुराई से हाथ जोड़े और कहा— “हे गजानन! यदि आप मुझ पर सच में प्रसन्न हैं, तो मुझे नौ करोड़ की माया दें, निरोगी काया दें, अमर सुहाग दें, आंखों की रोशनी दें, नाती दें, पोता दें, मेरे सब परिवार को सुख दें और अंत में मोक्ष प्रदान करें।”
बुढ़िया की यह बात सुनकर गणेश जी मुस्कुरा उठे। वे बोले— “बुढ़िया मां! तूने तो हमें ठग लिया। तूने एक ही वरदान में सब कुछ मांग लिया। फिर भी, जो तूने मांगा है, मेरे वचन के अनुसार वह सब तुझे प्राप्त होगा।” इतना कहकर भगवान गणेश अंतर्धान हो गए। उधर, गणेश जी के आशीर्वाद से अंधी बुढ़िया माँ ने जो-जो मांगा था, वह सब कुछ उसे मिल गया। उसकी आँखें ठीक हो गईं, घर धन-धान्य से भर गया और परिवार में खुशियाँ आ गईं।
जयकारा: हे गणेश जी महाराज! जैसे आपने उस अंधी बुढ़िया माँ की पुकार सुनकर उसे सब कुछ दिया, वैसे ही इस कथा को कहने वाले, सुनने वाले और हुंकारा भरने वाले— सभी के कष्ट दूर करना और उनकी मनोकामनाएं पूर्ण करना। बोलो गजानन भगवान की जय!
तो यह थी श्री गणेश जी की छोटी सी कहानी ! आशा है आपको यह पसंद आई होगी।






